बुधवार, 14 अप्रैल 2010

कैट और रैट

एक थी कैट और एक था रैट । दोनों फ़्रैण्ड थे । दोनों साथ-साथ रहते थे, घूमने जाते , खाना भी इक्कठा खाते। एक दिन वो दोनों घूमने गए तो अपना छाता और पानी साथ ले जाना भूल गए । उनको बहुत धूप लगी और प्यास भी लगी । फ़िर उन्होंने रास्ते में एक पौण्ड देखा जिसमें थोडा सा गंदा
पानी था , दोनों नें वही पानी पी लिया और एक पेड के नीचे सो गए । थोडी देर बाद दोनों के पेट में दर्द होने लगा । फ़िर वो डाक्टर अंकल के पास गए । डाक्टर अंकल नें दोनों को इंजेक्शन लगाया तो ठीक हो गए । फ़िर डाक्टर अंकल नें बोला तुमनें गंदा पानी पिया था , इसलिए पेट में दर्द होने लगा ।

डाक्टर अंकल नें दोनों को डांटा "आगे से गंदा पानी पिओगे" ।

नहीं, नहीं हम गंदा पानी नहीं पिएंगे ।

सेअ सोरी हम आगे से अपनी पानी की बोतल साथ लेकर जाएंगे ।

सोरी डाक्टर अंकल , हम आगे से अपना पानी साथ लेकर जाएंगे ।

फ़िर वो दोनों घर आ गए ।


यह कहानी मैनें मम्मी के साथ मिलकर बनाई |

9 टिप्‍पणियां:

Amitraghat ने कहा…

कहानी सच में बहुत अच्छी थी और बहुत सुन्दर फोटो और साथ में स्लाईड शो भी बढ़िया है......."

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

यह बढ़िया कहानी
मेरी मम्मी ने मुझे सुनाई!

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रंग-रँगीला जोकर
माँग नहीं सकता न, प्यारे-प्यारे, मस्त नज़ारे!
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संपादक : सरस पायस

दिलीप ने कहा…

cho chweet ....

Laviza ने कहा…

ये तो बहुत अच्छी कहानी है... मैं भी ऐसा ही करती हूँ... कहीं भी जाऊं पानी साथ लेकर जाती हूँ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर कथा!

शुभम् जी!
आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी की गई है-

http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_6838.html

बेचैन आत्मा ने कहा…

बहुत प्यारी कहानी लिखी है आपने मम्मी के साथ.

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

चर्चा मंच पर
महक उठा मन
शीर्षक के अंतर्गत
इस ब्लॉग की चर्चा की गई है!

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संपादक : सरस पायस

माधव ने कहा…

पानी गर्म कर करके पी सकते थे लकिन सबसे अच्छा है पानी की बोतल लेकर साथ चलना , मै तो कही भी जाता हूँ , मेरी मम्मी पानी और दूध साथ लेकर चलती है

http://shubhamsachdeva.blogspot.com/ ने कहा…

aap sabka THANK U

टेम्प्लेट परिकल्पना एवँ अनुकूलन :डा.अमर कुमार 2009