शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

क्रोअ और बंटी


एक क्रो (कौआ ) था , वह दूर तक फ़्लाई कर रहा था । फ़्लाई करते-करते उसे बहुत भूख भी लगी और प्यास भी लग रही थी । पर वह क्या करता ?
फ़िर उसनें पता है क्या देखा ?
क्या देखा...?
उसनें बंटी को देखा ।
कौन बंटी ..?
बंटी जो छत पर पतंग उडा रहा था । और पतंग उडाते-उडाते उसकी पतंग कट गई और ऊपर फ़्लाई करने लगी ।
फ़िर...........
फ़िर बंटी रोने लगा । क्रोअ बंटी को देख रहा था , वह बंटी के पास आया और बोला....
तुम क्यों रो रहे हो.....?
मेरी पतंग कट गई , अब मैं कैसे खेलुंगा , बंटी नें रोते-रोते कहा ।
प्लीज़ तुम रोओ मत , मैं तुम्हारी हेल्प करुंगा , पर तुम्हें भी मेरी हेल्प करनी होगी ( क्रोअ नें बंटी से कहा )
मैं तुम्हारी कैसे हेल्प कर सकता हूं (बंटी नें पूछा )
मुझे बहुत भूख लगी है और प्यास भी , अगर तुम मुझे पानी पिला दो और कुछ खाने को दे दो तो मैं तुम्हारी पतंग वापिस ले आऊंगा ।
क्रोअ की बात सुनकर बंटी खुश हो गया .....
ठीक है मैं तुम्हारे लिए खाना और पानी लाता हूं , तब तक तुम मेरी पतंग ले आओ ।
सुनकर क्रोअ कांव कांव करता ऊपर फ़्लाई कर गया और पतंग अपनी चोंच में पकड कर ले आया ।
बंटी भी क्रोअ के लिए पता है क्या लेकर आया ?
क्या लाया....?
मैंगो जूस और चिप्स ।
अरे वाह , फ़िर तो क्रोअ को बहुत मजा आया होगा न ।
हां क्रोअ को भी बहुत मजा आया और बंटी भी अपनी पतंग वापिस पाकर खुश हो गया ।वो दोनों फ़्रैण्ड बन गए ।
हमें भी अपने फ़्रैण्डस की हेल्प  करनी चाहिए न ।
हां , हमें हमेशा अपने फ़्रैण्डस की हेल्प करनी चाहिए ।

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2 टिप्‍पणियां:

माधव ने कहा…

सुन्दर सन्देश

माधव ने कहा…

सुन्दर सन्देश

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