शुक्रवार, 19 मई 2017

हर बुराई में एक अच्छाई ( कहानी )


प्रिय दोस्तो ,
मैं फ़िर से उपस्थित हूँ अपनी एक छोटी सी नई कहानी के साथ , जिसका शीर्षक है .... हर बुराई में एक अच्छाई
      एक बार एक किसान था , जिसका नाम था मलनाथ । उसके घर से थोडी दूरी पर खेत में एक कुआँ था । मलनाथ के पास दो मटके थे और वह  हर रोज कुएँ से पानी के मटके भर कर लाता । मलनाथ अकेला रहता था और अपने मटकों को भी उसने नाम दे रखे थे - एक का नाम था मिंटु और दूसरे का नाम था पिंटु । एक दिन मिंटु मटका रोने लगा । पिंटु ने उससे रोने का कारण पूछा तो मिंटु रोत्र-रोते बोला - मैं बहुत बदनसीब हूँ , क्योंकि मुझमें दो-तीन छेद हैं और जिसके कारण मैं पूरा पानी अपने मालिक को नहीं दे पाता । 



फ़िर भी वह मुझे फ़ेंकता नहीं है । मिंटु को अपनी मजबूरी और अपने मालिक की दयालुता पर बहुत दुख हुआ । उन दोनों की बात मलनाथ चुपके से सुन रहा था । वह उनके पास आया और मिंटु को समझाते हुए बोला - कभी भी अपने आपको कमजोर नहीं समझना चाहिए । हर बुराई में भी कहीं न कहीं अच्छाई छुपी होती है । फ़िर वह पिंटु और मिंटु को अपने साथ उस रास्ते पर ले गया , जिस रास्ते से वह रोज पानी भर कर लाता था । रास्ते में बहुत सारे फ़ूल खिले हुए थे । मलनाथ ने बताया कि यह फ़ूलों के पौद्धे उसी पानी से फ़ले-फ़ूले हैं , जो तुममे छेद होने के कारण बह जाता था । यह देखकर पिंटु और मिंटु बहुत खुश हुए । 

शनिवार, 29 दिसंबर 2012

Maadhav kaa Birthday ( A smaal story )


LMü sÉQûMüÉ jÉÉ , ÎeÉxÉMüÉ lÉÉqÉ jÉÉ  qÉÉkÉuÉ | uÉWû oÉWÒûiÉ WûÏ vÉæiÉÉlÉ oÉccÉÉ jÉÉ , AmÉlÉÏ qÉqqÉÏ MüÐ oÉÉiÉ MüpÉÏ lÉWûÏÇ qÉÉlÉiÉÉ jÉÉ | ExÉMüÐ qÉqqÉÏ ExÉå ÌMüiÉlÉÉ xÉqÉfÉÉiÉÏ , sÉåÌMülÉ uÉWû xÉqÉfÉiÉÉ WûÏ lÉWûÏÇ | ExÉMüÐ OûÏcÉU pÉÏ ExÉMüÐ ÍvÉMüÉrÉiÉ MüUiÉÏ mÉU uÉWû MüÉåD MüÉqÉ lÉWûÏÇ MüUiÉÉ jÉÉ | eÉoÉ uÉWû xÉÉiÉ xÉÉsÉ MüÉ WÒûAÉ iÉÉå ExÉMåü oÉjÉï Qåû mÉU ExÉMüÐ qÉqqÉÏ lÉåÇ MüWûÉ - iÉÑqÉ MüÉåD MüÉqÉ lÉWûÏÇ MüUiÉå WûÉå , ÌMüxÉÏ MüÐ oÉÉiÉ lÉWûÏÇ qÉÉlÉiÉå WûÉå , CxÉÍsÉL AoÉ MüÐ oÉÉU - lÉÉå mÉÉOûÏï , lÉÉå ÄTëæühQèxÉ , lÉÉå ÌaÉÄnOèxÉ | qÉqqÉÏ MüÐ oÉÉiÉ xÉÑlÉMüU qÉÉkÉuÉ oÉWÒûiÉ ÌlÉUÉvÉ WûÉå aÉrÉÉ , ExÉå oÉWÒûiÉ oÉÑUÉ sÉaÉÉ | ÌÄTüU eÉoÉ ExÉMüÐ qÉqqÉÏ oÉÉÄeÉÉU aÉD iÉÉå ExÉlÉåÇ AmÉlÉÏ xÉÉUÏ lÉÉåOû-oÉÑYxÉ ÌlÉMüÉsÉÏÇ AÉæU xÉÉUÉ MüÉqÉ eÉsSÏ - eÉsSÏ ZÉiqÉ MüU ÍsÉrÉÉ | eÉoÉ ExÉMüÐ qÉqqÉÏ AÉD , iÉÉå ExÉlÉåÇ oÉÉåsÉÉ  , xÉÊUÏ qÉqqÉÏ qÉæÇ AÉaÉå xÉå xÉÉUÉ MüÉqÉ MüÂÆaÉÉ AÉæU OûÏcÉU MüÉå pÉÏ ÌMüxÉÏ ÍvÉMüÉrÉiÉ MüÉ qÉÉæMüÉ lÉWûÏÇ SÕÆaÉÉ |

qÉqqÉÏ lÉåÇ ExÉå ÌoÉlÉÉ SåZÉå WûÏ MüWûÉ - PûÏMü Wæû , PûÏMü Wæû | mÉWûsÉå AmÉlÉÉ mÉWûsÉå MüÉ MüÉqÉ iÉÉå mÉÔUÉ MüUÉå |  

qÉæÇ ApÉÏ MüÂÆaÉÉ   qÉÉkÉuÉ lÉåÇ qÉlÉ WûÏ qÉlÉ qÉÑxMÑüUÉiÉå WÒûL MüWûÉ |

qÉqqÉÏ qÉÉkÉuÉ MüÐ oÉÉiÉ xÉÑlÉMüU WæûUÉlÉ WûÉå aÉD AÉæU fÉOû xÉå ExÉMåü xMÔüsÉ oÉæaÉ xÉå lÉÉåOû oÉÑYxÉ ÌlÉMüÉsÉ MüU SålÉå sÉaÉÏ | eÉoÉ lÉÉåOû-oÉÑYxÉ ZÉÉåsÉ MüU SåZÉÏÇ iÉÉå SåZÉiÉÏ WûÏ UWû aÉD |

qÉÉkÉuÉ eÉÉåU-eÉÉåU xÉå WûÆxÉlÉå sÉaÉÉ |

qÉqqÉÏ pÉÏ qÉÉkÉuÉ Måü xÉÉjÉ WûÆxÉlÉå sÉaÉÏ AÉæU ExÉå aÉsÉå xÉå sÉaÉÉ ÍsÉrÉÉ AÉæU ÌÄTüU uÉWû oÉWÒûiÉ AcNûÉ oÉccÉÉ oÉlÉ aÉrÉÉ |
 

oÉiÉÉCL qÉåUÉ ÍcÉ§É MæüxÉÉ sÉaÉ UWûÉ Wæû | LMü ÌSlÉ qÉqqÉÏ MüÉ SÒmmÉOèOûÉ WûÉjÉ sÉaÉ aÉrÉÉ AÉæU ZÉÑS MüÉå AÉÆcÉsÉ qÉåÇ NÒûmÉÉ sÉålÉå MüÉ qÉlÉ ÌMürÉÉ , oÉxÉ WûqÉlÉå AmÉlÉå AÉmÉ MüÉå CiÉlÉÏ ZÉÔoÉxÉÔUiÉÏ xÉå sÉmÉåOûÉ ÌMü qÉqqÉÏ WûqÉÉUÉ ÍcÉ§É sÉålÉå MüÉå qÉÄeÉoÉÔU WûÉå aÉD |


सोमवार, 17 जनवरी 2011

बेबी रेबिट

एक बेबी रेबिट था । उसे एक चाक्लेट मिली । उसनें वह चाक्लेट अपनी मम्मी को दे दी । उसकी मम्मी बहुत हैपी हुई ।फ़िर मम्मी नें बेबी रेबिट से पूछा " तुम क्या लोगे " तो बेबी रेबिट नें कहा " मुझे कैरेट चाहिए "। पर मम्मी के पास तो कैरेट नहीं था ।वो कैसे देती ?

फ़िर...........

फ़िर मम्मी नें बेबी रेबिट को सोरी बोला और कहा - "तुम अभी खाना खाओ , कैरेट तुम्हें कल लाकर दूंगी "।

"फ़िर बेबी रेबिट तो रोने लगा होगा न .........?"

नहीं , बेबी रेबिट तो अच्छा बच्चा था , उसनें मम्मी की बात मान ली "।

हां , वैरी गुड , ये तो बहुत अच्छी बात है "।

हां , और बेबी रेबिट नें खाना खा लिया ।जब वो खाना खा रहा था तो उसकी मम्मी कपडे आयरन करने लगी । फ़िर पता है बेबी रेबिट नें क्या किया ?

क्या किया ?


उसनें अपना पूरा खाना फ़िनिश कर दिया और किचन में जाकर प्लेट वाश करके रख दी और अपने हैण्ड भी वाश किए । उसकी मम्मी को पता भी नहीं चला । जब मम्मी नें देखा - टेबल पर तो खाने वाली प्लेट नहीं थी । फ़िर मम्मी नें बेबी रेबिट को पूछा -"आपनें खाने वाली प्लेट कहां रख दी तो बेबी रेबिट नें बताया " वो तो मैनें वाश करके किचन में रख दी "। उसकी मम्मी देखकर बहुत खुश हुई और बेबी रेबिट को बहुत सारी चिजी दी । बेबी रेबिट हैपी हो गया और खेलने लगा ।

सोमवार, 20 दिसंबर 2010

चित्रकला प्रदर्शनी

नमस्कार दोसतो ,




आज लगभग दो माह बाद मैं फ़िर से आया हूं आपके लिए लेकर एक नन्ही सी कविता । कल जब हम स्कूल जा रहे थे तो रास्ते में बारिश होने लगी तो मैनें मम्मी को एक कविता सुना दी , आप भी पढिए । हां मुझसे चिमटा-चिमटा का मतलब मत पूछिएगा , वो तो मुझे क्या मम्मी को भी नहीं पता । आपको पता हो तो मुझे जरूर बताईएगा ।

चिमटा-चिमटा बारिश होती

मोटर गाडी चलती जाती

मम्मी तो छाता ले लेती

मुझको रेन कोट पहनाती

चिमटा-चिमटा बारिश होती



हमारे स्कूल में चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया । मम्मी के साथ मैनें भी कुछ चित्र / माडल बनाए । नन्हें-मुन्ने बच्चों की प्यारी-प्यारी कला-क्रितियां देखकर हमें बहुत मजा आया । आप भी देखिए उसकी कुछ झलकियां ।



                                     

आपका
शुभम सचदेव

शनिवार, 18 सितंबर 2010

हर दिन हीरो बनता जाता



पिऊं दूध और खाऊं मलाई 
अच्छी लगती मुझे मिठाई 
थोडा-थोडा बढता जाता 
हर दिन हीरो बनता जाता 

शनिवार, 11 सितंबर 2010

गणेश जी की दुनिया

नमस्कार दोसतो ,
आज गणेश चतुर्थी है न तो मुझे मम्मी नें गणेश जी की एक बहुत अच्छी कहानी सुनाई । मैं आपको भी सुनाऊं ----

गणेश जी की दुनिया 

एक बार गणेश जी अपने बडे भाई कार्तिकेय के साथ खेली-खेली कर रहे थे , तो दोनों भाई फ़ाईट करने लगे ।
फ़ाईट.....पर क्यों ?
क्योंकि गणेश जी के बडे भाई कह्ते थे मैं स्ट्रांग ब्वाय हूं और गणेश जी कहते मैं हूं ।
फ़िर ....
फ़िर दोनों नें एक फ़ैसला किया ।
कैसा फ़ैसला ?
यही कि जो पूरी दुनिया घूम कर सबसे पहले वापिस आएगा , वही स्ट्रांग होगा ।
तो क्या हुआ ?
 तो कार्तिकेय जी तो तेज-तेज भागी-भागी करने लगे और गणेश जी तो भागे ही नहीं ।
फ़िर तो गणेश जी हार गए होंगे ?
नहीं , गणॆश जी नें पता है क्या किया ?
क्या किया ?
उन्होंनें अपने मम्मी-पापा के गिर्द एक चक्कर लगाया और मम्मी की गोदि में बैठकर लड्डु खाने लगे ।
तो कार्तिकेय का क्या हुआ ?
वो तो भागी-भागी करते-करते थक गया और जब वापिस आया तो गणेश जी को मम्मी की गोदि में आराम से बैठा देखकर बोला-
अरे , तुम तो लेज़ी ब्वाय हो , देखो मैं पूरी दुनिया घूम कर आ गया और तुम वहीं बैठे हो , इसलिए मैं स्ट्रांग ब्वाय हूं ।"
तो गणेश जी नें पता है क्या कहा ---
क्या कहा...?
मैं स्ट्रांग ब्वाय हूं , क्योंकि मैं तुमसे पहले ही चक्कर लगा आया हूं ।
पर कैसे ?
मैनें मम्मी पापा के गिर्द घूम लिया और वही मेरी पूरी दुनिया हैं । मम्मी-पापा से बढकर तो कुछ भी नहीं ।"
फ़िर .....?
फ़िर गणेश जी की बात सुनकर कार्तिकेय नें अपनी हार मान ली ।

हैपी गणेशोत्सव टू आल आफ़ यू ।

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

नटखट कान्हा की मुलरी ( मुरली )

आपको कान्हा की पहले मैंने दो कहानियां सुनाई न और आप सबको अच्छी भी लगीं | मैं आप सब का आभारी हूँ कि आपको मेरी कहानियां पसंद आ रही हैं | अब कान्हा की एक और कहानी सुनाऊँ | 
एक बार कान्हा घर में अपनी मम्मी के पास खेली-खेली कर रहा था तो उसनें बाहर से आवाज सूनी |
कैसी आवाज़ ....?
वो बाहर मुलरी ( मुरली , मुझे मुरली बोलना नहीं आता तो मैं मुरली को मुलरी बोलता हूँ ) बेचने वाले अंकल आए थे न |
मुलरी बेचने वाले अंकल......?
हाँ जैसे यहाँ नहीं आते हैं कभी-कभी और  आप मुझे लेकर देते हो ?
हाँ .....| 
वैसे ही .....| 
फिर ......|
फिर कान्हा नें अपनी मम्मी को बोला -मुझे भी मुलरी चाहिए |
तो मम्मी नें पता है क्या कहा ....?
क्या कहा ...?
मम्मी नें कहा - तुम आगे से कोइ शैतानी नहीं करोगे तो मैं तुम्हें मुरली लेकर दूंगी |
कौन सी शैतानी ?
तुम किसी का माखन नहीं चुराओगे 

प्रोमिस मम्मी मैं आगे से कोइ शैतानी नहीं करूंगा | कान्हा नें कान पकड़ कर मम्मी को सॉरी बोला |
तो  फिर.........
तो फिर मम्मी हँसने लगी और कान्हा को एक मुलरी लेकर दी | कान्हा मुलरी लेकर बहुत हैपी - हैपी हुआ और वो मुलरी बजाने लगा |
फिर क्या हुआ ......?
फिर .....कल बताऊंगा कि क्या हुआ ? 

टेम्प्लेट परिकल्पना एवँ अनुकूलन :डा.अमर कुमार 2009