मंगलवार, 17 अगस्त 2010

नटखट कान्हा की मुलरी ( मुरली )

आपको कान्हा की पहले मैंने दो कहानियां सुनाई न और आप सबको अच्छी भी लगीं | मैं आप सब का आभारी हूँ कि आपको मेरी कहानियां पसंद आ रही हैं | अब कान्हा की एक और कहानी सुनाऊँ | 
एक बार कान्हा घर में अपनी मम्मी के पास खेली-खेली कर रहा था तो उसनें बाहर से आवाज सूनी |
कैसी आवाज़ ....?
वो बाहर मुलरी ( मुरली , मुझे मुरली बोलना नहीं आता तो मैं मुरली को मुलरी बोलता हूँ ) बेचने वाले अंकल आए थे न |
मुलरी बेचने वाले अंकल......?
हाँ जैसे यहाँ नहीं आते हैं कभी-कभी और  आप मुझे लेकर देते हो ?
हाँ .....| 
वैसे ही .....| 
फिर ......|
फिर कान्हा नें अपनी मम्मी को बोला -मुझे भी मुलरी चाहिए |
तो मम्मी नें पता है क्या कहा ....?
क्या कहा ...?
मम्मी नें कहा - तुम आगे से कोइ शैतानी नहीं करोगे तो मैं तुम्हें मुरली लेकर दूंगी |
कौन सी शैतानी ?
तुम किसी का माखन नहीं चुराओगे 

प्रोमिस मम्मी मैं आगे से कोइ शैतानी नहीं करूंगा | कान्हा नें कान पकड़ कर मम्मी को सॉरी बोला |
तो  फिर.........
तो फिर मम्मी हँसने लगी और कान्हा को एक मुलरी लेकर दी | कान्हा मुलरी लेकर बहुत हैपी - हैपी हुआ और वो मुलरी बजाने लगा |
फिर क्या हुआ ......?
फिर .....कल बताऊंगा कि क्या हुआ ? 

4 टिप्‍पणियां:

हमारीवाणी.कॉम ने कहा…

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Akanksha Yadav ने कहा…

वाह, अच्छी कहानी और प्यारे-प्यारे चित्र..बधाई.

Akshita (Pakhi) ने कहा…

नन्हां कान्हा तो बहुत प्यारा लगा...
_________________
पाखी की दुनिया में मायाबंदर की सैर...

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

मनभावन होने के कारण
"सरस पायस" पर हुई "सरस चर्चा" में
प्यारी-प्यारी इस चर्चा में प्यार बहुत है
!

शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!

टेम्प्लेट परिकल्पना एवँ अनुकूलन :डा.अमर कुमार 2009