बुधवार, 21 जुलाई 2010

छिपकली और चूहे



एक न छिपकली थी , उसके बहुत सारे फ़्रैण्डस थे ।
पता है उसके फ़्रैण्ड्स कौन थे ?
कौन थे ...?
चूहे...... 
चूहे छिपकली के फ़्रैण्डस थे ...?
हां , और वो सब मिलकर रहते थे । उनके घर के पास न एक स्नेक भी रहता था ।
उन्हें डर नहीं लगता था स्नेक से ।
लगता था , स्नेक हर रोज चूहों को मारता था । वो जब भी स्नेक को देखते घर से  भाग जाते , पर स्नेक उनके बच्चों को पकड के खा जाता । 
चूहे बहुत दुखी रहते थे , पर क्या करते ?
उनकी जो फ़्रैण्ड थी न छिपकली 
हां ....
एक दिन उसे बहुत गुस्सा आया । और जब स्नेक उनके घर में आया न तो वह जानबूझ कर स्नेक के सामने आ गई और स्नेक नें उसे चूहा समझ कर पकड लिया और खाने लगा । जैसे ही उसे मुंह के पास ले गया छिपकली नें जोर से स्नेक की आंख में मारा । अब तो वह देख भी नहीं सकता था और इधर उधर घूमने लगा । सारे चूहे और छिपकली उसे कभी इधर से छेड्ते और कभी उधर से छेडते , पर वो किसी को भी पकड नहीं सकता था ।
फ़िर क्या हुआ ?
फ़िर स्नेक रोने लगा और उसनें चूहों से माफ़ी भी मांगी और चूहों नें उसको जाने दिया । 

4 टिप्‍पणियां:

Akshita (Pakhi) ने कहा…

ये तो मजेदार कहानी है....

माधव ने कहा…

nice

माधव ने कहा…

nice

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर पोस्ट!
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इसकी चर्चा यहाँ भी है-
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/07/9.html

टेम्प्लेट परिकल्पना एवँ अनुकूलन :डा.अमर कुमार 2009