शुक्रवार, 18 जून 2010

बेबी डागी का होम-वर्क

. हेल्लो फ़्रैण्ड्स ,
कैसे हैं आप सब ? मेरे स्कूल में तो छुट्टियां चल रही हैं और मैने खूब मस्ती भी की है पूरा एक महीना । अब घूम-घाम कर वापिस आया तो मम्मी नें हाथ में नोट-बुक्स थमा दी , दो दिन से मेरा बिल्कुल भी काम में मन नहीं लगा और मैने काम न करने के खूब बहाने पे बहाने भी बनाए । मम्मी को कब तक टालता , उन्हें भी मेरी कमजोरी पता है न कि मुझे स्टोरी सुनना बेहद पसंद है , बस मम्मी नें मुझे स्टोरी न सुनाकर मेरे डागी को सुनाई जिसे मैनें चुपके से सुना और एक ही दिन में पूरा होम-वर्क फ़िनिश कर दिया । आपको भी सुनाऊं वो स्टोरी जो मम्मी नें डागी को सुनाई........

एक डागी था , उसका छोटा सा एक बेबी था । सब उसे बेबी डागी बोलते । उसकी मम्मी उसे बहुत प्यार करती । बेबी डागी भी मम्मी से बहुत प्यार करता । मम्मी की हर बात मानता पर


छोटा सा गंदा

बच्चा भी था , क्योंकि वह होम-वर्क नहीं करता था । उसकी मम्मी उसको बहुत सारी घुमी-घुमी करवा कर लाती , बहुत सारे ट्वायस लेकर देती लेकिन बेबी डागी को जब होम-वर्क के लिए बोलती तो कोई न कोई बहाने बनाने लगता । फ़िर उसकी मम्मी को बहुत गुस्सा आया और बेबी डागी से बोलना बंद कर दिया । अब बेबी डगी से कोई बात ही नहीं करत था । वो मम्मी को बोलता मम्मी भूख लगी है तो मम्मी चुपचाप खाना दे देती और कहती...अपने आप खा लो । बेबी डागी को मम्मी के बगैर खाना बिल्कुल
अच्छा नहीं लगता था । उसे मम्मी के साथ खेलना बहुत अच्छा लगता था लेकिन अब मम्मी तो बात ही नहीं करती थी , फ़िर वह किसके साथ खेले । फ़िर मम्मी को बोलता...मम्मी मम्मी मुझे बाहर घूमने जाना है । तो मम्मी बोलती अकेले चले जाओ । फ़िर ऐसे रात हो गई । बेबी डागी को सोते समय मम्मी का पीठ पर प्यार से हाथ फ़ेरने से बहुत मजा आता था और स्टोरी सुने बिना तो उसे निनी ही नहीं आती थी पर उसकी मम्मी तो चुपचाप दूसरी तरफ़ मुंह करके सो गई । बेबी डागी को निनी(नींद ) ही नहीं आई , वो कैसे सोएगा । बेबी डागी बहुत उदास हो गया । उसने मम्मी को बुलाया ,पर मम्मी नें कहा - जब तक होम-वर्क फ़िनिश नहीं होगा मुझसे बात मत करना । तो फ़िर मम्मी तो सो गई और बेबी डागी उठ कर होम-वर्क करने लगा । उसनें सारा होम-वर्क जलदी से फ़िनिश कर दिया और फ़िर मम्मी को जाकर जगाया ।

मम्मी मम्मी उठो ।

मैं नहीं उठूंगी , आप होम-वर नहीं करते हो इसलिए बात भी नहीं करुंगी ।

मम्मी मेरी बात तो सुनो ।

मुझे कुछ नहीं सुनना है ।

मम्मी एक बार देखो तो सही , यह क्या है , और बेबी डागी नें अपनी नोट-बुक मम्मी के सामने कर दी ।

मम्मी नें देखा...अरे ये तो सारा होम-वर्क कर लिया आपने । कब किया ?

जब आप सोई-सोई कर रही थीं ।

अब मम्मी नें बेबी डागी को बहुत सारा प्यार किया । उसे खाना खिलाया ,लम्बे वाली स्टोरी सुनाई और फ़िर प्यार से उसकी पीठ पर हाथ फ़ेरने लगी तो बेबी डागी मिट्ठी-मिट्ठी निनी सो गया । अगले दिन मम्मी नें उसे ढेर सारी चिज्जी लेकर दी ।


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पता है मम्मी नें जब यह कहानी मेरे डागी को सुनाई तो मैं भी पास ही बैठा था और मैनें मम्मी से सारी बोला और मम्मी को होम-वर्क करवाने को कहा । मम्मी नें भी मुझे झट से होम-वर्क करवा दिया , फ़िर हमनें खूब मस्ती की ।

3 टिप्‍पणियां:

hem pandey ने कहा…

बच्चों पर बनाए गये अन्य ब्लोगों की अपेक्षा मुझे आपका ब्लॉग अच्छा लगा क्योंकि इसमें साथ में शिक्षाप्रद कहानी भी दी गयी है. साधुवाद.

माधव ने कहा…

बहुत अच्छा ,

Akshita (Pakhi) ने कहा…

कहानी है ही इतनी मजेदार चीज...

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'पाखी की दुनिया' में 'पाखी का लैपटॉप' देखने जरुर आइयेगा.

टेम्प्लेट परिकल्पना एवँ अनुकूलन :डा.अमर कुमार 2009