क्रोअ और बंटी

एक क्रो (कौआ ) था , वह दूर तक फ़्लाई कर रहा था । फ़्लाई करते-करते उसे बहुत भूख भी लगी और प्यास भी लग रही थी । पर वह क्या करता ? फ़िर उसनें पता है क्या देखा ? क्या देखा...? उसनें बंटी को देखा । कौन बंटी ..? बंटी जो छत पर पतंग उडा रहा था । और पतंग उडाते-उडाते उसकी पतंग कट गई और ऊपर फ़्लाई करने लगी । फ़िर........... फ़िर बंटी रोने लगा । क्रोअ बंटी को देख रहा था , वह बंटी के पास आया और बोला.... तुम क्यों रो रहे हो.....? मेरी पतंग कट गई , अब मैं कैसे खेलुंगा , बंटी नें रोते-रोते कहा । प्लीज़ तुम रोओ मत , मैं तुम्हारी हेल्प करुंगा , पर तुम्हें भी मेरी हेल्प करनी होगी ( क्रोअ नें बंटी से कहा ) मैं तुम्हारी कैसे हेल्प कर सकता हूं (बंटी नें पूछा ) मुझे बहुत भूख लगी है और प्यास भी , अगर तुम मुझे पानी पिला दो और कुछ खाने को दे दो तो मैं तुम्हारी पतंग वापिस ले आऊंगा । क्रोअ की बात सुनकर बंटी खुश हो गया ..... ठीक है मैं तुम्हारे लिए खाना और पानी लाता हूं , तब तक तुम मेरी पतंग ले आओ । सुनकर क्रोअ कांव कांव करता ऊपर फ़्लाई कर गया और पतंग अपनी चोंच में पकड कर ले आया । बंटी भी क्रोअ के...