बुधवार, 9 जून 2010

रैबिट और कछुए की कहानी !!

एक बार एक रैबिट नें एक कछुए को पता है क्या बोला ?
क्या बोला ?

रैबिट नें बोला

:- देखो तुम कितने गंदे बच्चे हो , भागी-भागे नहीं कर सकते ।

फ़िर कछुए नें पता है क्या बोला ?

क्या बोला ?

कछुए नें बोला, तुम मेरे साथ रेस लगाकर देखो , मै तो तुमसे ज्यादा भागता हूं ?

रैबिट नें बोला हां हम रेस लगाएंगे ।

तो कछुए नें पता है क्या किया ?

क्या किया ?

कछुए नें रैबिट को बोला, हम दोनों तो फ़्रैण्ड हैं और उसे एक चाक्लेट भी खाने को दी ।

रैबिट नें चाक्लेट खा ली । फ़िर दोनों भागी-भागी करने लगे ।

फ़िर पता है क्या हुआ ?

क्या हुआ ?

रैबिट को वोमेट होने लगी ।

क्यों रैबिट को वोमेट क्यों होने लगी ?

कछुए नें जो चाक्लेट दी थी वो गंदी वाली थी न, इसी लिए ।

इस लिए गंदी चिज्जी नहीं खानी चाहिए न \हां गंदी चिज्जी भी नहीं खानी चाहिए और किसी से भी चिज्जी लेकर नहीं खानी चाहिए, न ही किसी से मांगनी चाहिए ।

हा, नहीं तो वोमेट हो जाती है । मैं तो किसी से चिज्जी नहीं लेता । मै तो अच्छा बच्चा हूं न , मुझे तो वोमेट नहीं होगा ।

हां आपको तो वोमेट नहीं होगा, पर फ़िर रैबिट नें क्या किया ?

फ़िर रैबिट तो वोमेट करने लगा और कछुआ भागी -भागी करके जीत गया ।


मेरी यह कहानी भी ब्लागोत्सव-2010 में भी प्रकाशित हुई

6 टिप्‍पणियां:

रंजन ने कहा…

mast...

बिलकुल नई कहानी लिख दी बेटा जी..

प्यार..

mrityunjay kumar rai ने कहा…

innovation

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

अरे वाह!
यह बाल-कता तो बहुत बढ़िया है!

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

हा..हा..हा...सुन्दर कहानी . खूब मजेदार रही ये तो !!

नीरज जाट जी ने कहा…

बहुत बढिया।

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

मनभावन होने के कारण
चर्चा मंच पर

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